फन्ने खान एक ऐसी फिल्म जिसमें बॉलीवुड के दमदार अभिनेताओं का अभिनय दर्शकों को देखने को मिलेगा|
सदी के सदाबहार अभिनेता अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन और राजकुमार राव जैसे अनुभवी कलाकारों से सुसज्जित है,
ये फिल्म, लेकिन फिल्म की असल यू.एस.पी है पीहू सैंड जो अनिल कपूर की बेटी का किरदार निभा रही है, फिल्म की
पठकथा अतुल मान्जेकर ने लिखी है साथ ही उन्होंने इसे निर्देशित भी किया है| फिल्म का संगीत अमित त्रिवेदी ने दिया है|
इससे पहले भी बॉलीवुड में पिता-पुत्री के रिश्तों पर फिल्म बनाया गया है, पीकू इस कड़ी में एक शानदार उदाहरण है,
अगर फिल्म की बात की जाए तो फिल्म मूलता अनिल कपूर और उनकी बेटी के सपनों के इर्द - गिर्द घूमती है, जहाँ
अपने जवानी के दिनों में अनिल कपूर मो. रफ़ी की तरह एक कामयाब गायक बनना चाहते हैं मगर वक़्त की मार के
कारण उनका ये सपना एक सपना ही रह जाता है, और जीवन की गाडी को आगे खींचने के लिए वो एक ऑटो-रिक्शा
चालक का काम करने लगते हैं|
मगर कहीं ना कहीं उनका ये सपना फिर से उनके सामने आ खड़ा होता है, जब उन्हें ये पता लगता है कि, उनकी बेटी एक पॉप स्टाइल की गायिका बनना चाहती है, आवाज तो सुरीली है मगर ग्लैमर की दुनिया को जो चाहिए, एक सुन्दर बदन वो उसकी मालकिन नहीं है क्यूंकि वो मोटी हैं| पीहू सांड (लता शर्मा ) का किरदार बेबी सिंह (ऐश्वर्या राय बच्चन ) के किरदार से प्रभावित है जो एक पॉप स्टाइल की मसहूर गायिका है, आवाज सुरीली होने के बावजूद लता को हर गायन प्रतियोगीता से निकाल दिया जाता तथा समाज के लोग फब्तियां कसते है, अपने सपनों को एक इंसान मरता देख सकता है मगर अपने औलाद के सपनों को तार - तार होता नहीं देख सकता है, ऐसे में अनिल कपूर (फन्ने खान ) कैसे अपने साथियों से मिलकार अपने बेटी के इस सपने को पूरा करते हैं, यही है इस फिल्म की क्लाइमेक्स। पिता-पुत्री के रिश्तों को डायरेक्टर ने बड़े बखूबी से कैमरे में कैद किया है, दोनों के बीच के भावात्मक दृश्यों को देख सिनेमा घर में बैठे तमाम माता-पिता और उनकी औलादों को रुला देगी, राजकुमार राव जैसे सरीखे कलाकार इस पिता-पुत्री की जोडी में कहीं खो से गए हैं|
मगर कहीं ना कहीं उनका ये सपना फिर से उनके सामने आ खड़ा होता है, जब उन्हें ये पता लगता है कि, उनकी बेटी एक पॉप स्टाइल की गायिका बनना चाहती है, आवाज तो सुरीली है मगर ग्लैमर की दुनिया को जो चाहिए, एक सुन्दर बदन वो उसकी मालकिन नहीं है क्यूंकि वो मोटी हैं| पीहू सांड (लता शर्मा ) का किरदार बेबी सिंह (ऐश्वर्या राय बच्चन ) के किरदार से प्रभावित है जो एक पॉप स्टाइल की मसहूर गायिका है, आवाज सुरीली होने के बावजूद लता को हर गायन प्रतियोगीता से निकाल दिया जाता तथा समाज के लोग फब्तियां कसते है, अपने सपनों को एक इंसान मरता देख सकता है मगर अपने औलाद के सपनों को तार - तार होता नहीं देख सकता है, ऐसे में अनिल कपूर (फन्ने खान ) कैसे अपने साथियों से मिलकार अपने बेटी के इस सपने को पूरा करते हैं, यही है इस फिल्म की क्लाइमेक्स। पिता-पुत्री के रिश्तों को डायरेक्टर ने बड़े बखूबी से कैमरे में कैद किया है, दोनों के बीच के भावात्मक दृश्यों को देख सिनेमा घर में बैठे तमाम माता-पिता और उनकी औलादों को रुला देगी, राजकुमार राव जैसे सरीखे कलाकार इस पिता-पुत्री की जोडी में कहीं खो से गए हैं|
मेरे अच्छे दिन कब आएंगे एक पिता और हारे हुए इंसान के दर्द को दिखाता है, कुल मिलाकर इस सावन में मिशन
इंम्पॉसिबल के बाद लोगों को एक अच्छी फिल्म देखने को मिलेगी|

Bhai bahut sahi.. No spoiler alert, ekdum cut to cut gya he banda
ReplyDeleteNeed more blogs about films like karwan.. And many more
Good brother keep it up👍
Thanks for the valuable feedback Chandan. Sure we are working on it.
Deletegood. keep it on👍
ReplyDeleteThanks
DeleteSuperb mann keep it up....
ReplyDeleteThank you so much, do come always for more updates
DeleteGood to read. Nice work.
ReplyDeleteGood to read. Nice work.
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