चीन भारत और अमेरिका पर व्यापार युद्ध की दहशत
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| Photo Credit: The Hindu |
व्यापार एक देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का कार्य करता है,अगर एक देश में व्यापार करने की सहूलियत ज्यादा होगी, तो निश्चित तौर पर उस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत व सुदृढ़ होगी|
आज वैश्विक जगत में आए दिन कोई न कोई युद्ध का खतरा मंडराता रहता है, कभी परमाणु युद्ध तो कभी एक देश के एक दूजे देश की सरजमीं पर अपनी नजर बनाए रखना, जिसका उदाहरण है, रसिया का क्रीमिया पर कब्जा, चाइना एवं भारत का डोकलाम विवाद, आखिर ऐसा क्यों?
क्योंकि हर देश की आबादी बढ़ रही है, तथा रहने के संसाधन कम है, अगर व्यापार की बात की जाए, तो यह जानकर आप हैरान हो जाएंगे, जब आपको पता चलेगा कि, श्याओमी “XiaoMI” मोबाइल, जो एक चाइनीज उत्पाद है| इस मोबाइल कंपनी का 32% शेयर भारतीय बाजार से ही होता है|
आज सारे गतिशील देशों तथा विकसित देशों को चीन से अपने बाजारों में खतरा नजर आ रहा है, इसका सीधा सा उदाहरण देखा जा सकता है, जब डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने चीन के उत्पादों पर 200% ट्रैफिक लगा दी 1 जनवरी 1994 को कनाडा-मेक्सिको और USA के बीच व्यापार के लिए किए गए समझौते को डोनाल्ड ट्रंप ने हवा दी है, जो कुछ सालों से ठंडी पड़ी थी|
N.A.F.T.A (North American Free Trade Agreement) समझौता यह तीनों देशों के बीच तकरीबन 22.567 बिलियन डॉलर का कारोबार करती है| डोनाल्ड ट्रंप एक भूतपूर्व व्यापारी हैं और उन्होंने, फिर से N.A.F.T.A की बात की है, तो जरूर कोई बड़ी बात है|
भारत, चीन का कारोबार में बढ़ता प्रभुत्व देख कर परेशान है, हाल में ही मोदी जी ने दक्षिण एशिया का दौरा किया है, जहां उन्होंने इंडोनेशिया के सबरंग पोर्ट पर एक पोर्ट बनाने का समझौता किया है,जिसे व्यापारिक गलियारा बनाया जा सके, लेकिन यह हुआ क्यों? चीन के मेरीटाइम रुट के कारण|
आज सारे विकसित देश और विकासशील देश, भारत की ओर देख रहे हैं, क्योंकि भारत का बाजार क्षेत्र बड़ा है| हाल में ही वॉलमार्ट कंपनी जो एक USA की कंपनी है जिसने Flipkart के 77% शेयर को खरीद लिया है| जो आज तक की e-Commerce की सबसे बड़ी समझौता है, यह समझौता 16 मिलियन यूएस डॉलर की है, और अगर वॉलमार्ट का इतिहास देखा जाए तो, यह पता लगेगा कि यह छोटी कंपनियों को खजाने में विश्वास रखती है,अर्थात खत्म करने में विश्वास रखती है|
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| Photo Credit: Google |
ऐसा करके कहीं ना कहीं Wallmart ने Amazon का काम आसान कर दिया है, क्योंकि Amazon और Flipkart के बीच भारतीय e-Commerce बाजार में जंग थी| अभी हाल में ही Amazon ने भारतीय बाजार पर 5 बिलियन डॉलर निवेश किया है, तो कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत के बाजार पर सारे देशों की नजर है, और अगर व्यापार युद्ध की बात की जाए तो अमेरिका भारत और चीन इस दौड़ में आगे दौड़ रहे हैं, क्योंकि लगातार इन देशों की जरूरतें बढ़ रही है|
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